Mundeshwari Temple: देश का सबसे प्राचीन और चमत्कारी हिन्दू मंदिर

Mundeshwari Temple

मैं संदीप प्रकाश आज आपको देश के सबसे प्राचीन और चमत्कारी हिन्दू मंदिरो में से एक माँ Mundeshwari Temple की यात्रा पर ले कर चलते है। यह बिहार राज्य के कैमूर जिले में रामगढ के निकट मुंडेश्वरी पहाड़ी के शिखर पर स्थित है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई लगभग 600 मीटर है। मंदिर अपनी बनावट और वास्तुशिल्प के लिए बहुत मशहूर है। हरे भरे पहाड़ इस मंदिर की सुन्दरता को कई गुना बढ़ा देते है। यह मंदिर बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में देश के विभिन्न प्रदेशों से पर्यटक यहाँ पहुंचते है और विशेष अवशर जैसे नवरात्र ,रक्षाबंधन और शिवरात्रि पर प्रयटकों की संख्या कई गुणा बढ़ जाती है।

माँ मुंडेश्वरी मंदिर भगवान शिव और शक्ति को समर्पित अति प्राचीन मंदिर है, जहाँ पूजा भी की जाती है। इस मंदिर को भारत देश का सबसे प्राचीनतम मंदिरों में एक माना जाता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा लगे सुचना पट के अनुसार, यह मंदिर 625 ईसा पूर्व का है। 1915 से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस मंदिर की देखरेख करता है।

Architecture of the temple ( मन्दिर की वास्तुकला )

Mundeshwari Temple
मुंडेश्वरी मंदिर का फोटो @ copyright

मंदिर अष्टकोणीय योजना पर आधारित है और इसका निर्माण नगा शैली वास्तुकला ( Naga Style Architecture ) में पथरो से किया गया है। यह मंदिर बिहार राज्य में नगा वास्तुकला का सबसे पहला उदाहरण है। मंदिर चारों तरफ से हवादार बना हुआ है। मंदिर के चारो तरफ नक्कासीदार पथर के खूबसूरत खिड़कियाँ और दरवाजे बने हुए है। मुख्य प्रवेशद्वार के चौखट पर आप द्वारपालों, गंगा, यमुना और कई खूबसूरत मूर्तियों के नक्कासीदार छवि बनी हुई है। मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते ही आपको पहले चार मुख वाले शिवलिंग , भगवन गणेश और माता की दक्षिणमुखी प्रतिमा के दर्शन होते है।

Design of Mundeshwari temple ( मुंडेश्वरी मंदिर की बनावट )

माता मुंडेश्वरी इस मंदिर में महिषासुरमर्दिनी के रूप में भैंस की सवारी करते हुए दस हाथों वाली साढ़े तीन फीट की काले पत्थर की प्रतिमा है। माता के इसी रूप की पूजा की जाती है। मंदिर के गर्भगृह का प्राचीन छत नष्ट हो चूका था, जिसे बाद में निर्माण किया गया। मंदिर के बहरी दिवार पर बहुत ही खूबसूरती के साथ पत्थर पर नक्कासीदार फूल ,पते और मोल्डिंग के डिज़ाइन बने हुए है।

मुख्य मंदिर के बाहर आप इस मंदिर के चमत्कार को भी देख सकते है क्योकि मंदिर में बकरों की बलि भी दी जाती है परन्तु बकरे मरते नहीं है।

यहाँ चारो तरफ बहुत से मुख्य मंदिर से सम्बंधित पत्थर के टुकड़े बिखरे हुए है, जिसपर श्रीयंत्र ,कई सिद्ध यंत्र एवं मंत्र और सिंहली भाषा में पत्थरों पर कुछ अक्षर भी खुदे हुए हैं। यहाँ पर कई देवी देवताओं की खंडित मुर्तिया मिली है जिसको पटना संग्रहालय में रखा गया है और कुछ मुंडेश्वरी धाम में।

मुख्या मंदिर तक पर्यटक दो रास्तो से पहुंच सकते है, सीढ़ीनुमा और सड़क रास्ता। फोटोग्राफी और ट्रैकिंग करने वाले को सड़क रास्ता एक खूबसूरत दृश्य प्रस्तुत करता है। सीढ़ीनुमा रास्ता आपको थोड़ा जल्दी थका सकता है जिसके कारन आराम करने और पानी पिने की व्यवस्ता की गयी है। प्रत्येक थोड़ी थोड़ी दुरी पर जल के नलकूप की ब्यवस्ता की गयी है। परन्तु सड़क रास्ता से आप प्रकृति की खूबसूरती का आनन्द लेते आसानी से मंदिर पहुंच सकते
है।

Mundeshwari Dham ( मुंडेश्वरी धाम यात्रा का सही समय )

वैसे तो मंदिर पुरे वर्ष श्रद्धालुओ के लिए खुला रहता है किन्तु सरदी नवरात्र और चैत्र नवरात्र के दौरान काफी श्रद्धालु इस धार्मिक पर्यटन स्थल की यात्रा करते है।

Best time to visit Mundeshwari Temple ( मुंडेश्वरी मंदिर घूमने का सही मौसम ))

यहाँ पुरे वर्ष देश के अन्य राज्य और जिले के आस पास से पर्यटक यहाँ घूमने के लिए आते है।परन्तु मौसम के अनुसार पर्यटकों की संख्या घटती- बढ़ती रहती है, इसलिए आपके जानकारी के लिए यहाँ का मौसम की जानकारी इसप्रकार है :

April to June : 25 °C To 38 °C
July To September : 22 °C To 35 °C
October To March : 18 °C To 28 °C

Tourist places near Mundeshwari temple ( मुंडेश्वरी मंदिर के पास के पर्यटक स्थल )

  1. Telhar Waterfall ( तेलहर वॉटरफॉल )
  2. Bakhtiyar Khan Tomb ( बख्तियार खान मकबरा )
  3. Kaimur Wildlife Sanctuary ( कैमूर वन्यजीव अभ्यारण )

How to Reach Mundeshwari Temple ( मुंडेश्वरी मंदिर तक कैसे पहुंचे )

  1. सड़क = वाराणसी से लगभग 100 k.m और पटना से लगभग 200 k.m की दुरी पर सड़क माध्यम से बहुत ही अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। साथ ही साथ NH 2 भभुआ रोड रेलवे स्टेशन के पास से गुजरा है। मुंडेश्वरी मंदिर के पास का सबसे नजदीकी बस स्टैंड कैमूर जिला मुख्यालय भभुआ में खलासपुर बस स्टैंड ( Khalaspur Bus Stand ) है, जहाँ से पटना , गया , रांची , वाराणसी और बोकारो की बस मिलती है। बस स्टैंड से आप मिनी बस और टेम्पो, जीप सहयता से मंदिर पहुंच सकते है और मंदिर के निचे से सुबह 8 बजे से शाम के 4 बजे तक परिवहन मिलता है।
  1. ट्रेन = मंदिर से सबसे नजदीक का रेलवे स्टेशन मोहनिया रोड ( Mohania Road Railway Station ) है और यह वाराणसी – कोलकाता रेल रुट से जुड़ा हुआ है। दिन दयाल उपाध्या रेलवे जंक्शन (” मुगल सराय रेलवे जंक्शन “) भभुआ रोड स्टेशन से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यह देश के कई सारे प्रमुख रेलवे स्टेशन से जुड़ा हुआ है। आप यहाँ उतरकर बस और टेम्पो, जीप सहयता से मंदिर पहुंच सकते है।
  1. हवाई = वाराणसी स्थित Varanasi Airport लाल बहादुर शास्त्री अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लगभग 80 k.m दूर यहाँ का निकटतम हवाई अड्डा है। हवाई अड्डा पर उतरकर आप रेल, बस और कार की सहयता से मंदिर पहुंच सकते है।

सावधानी :

  1. दिल और हड्डी से सम्बंधित रोगी सड़क रास्ता का प्रयोग करे, क्योकि लगभग 650 खड़ा सीढ़ी चल कर मुख्य मंदिर तक पंहुचा जाता है।
  2. सड़क रास्ता का इस्तेमाल अकेले न करे, क्योंकि यह जंगल बिच से हो कर गुजरता है।
  3. मंदिर का प्रसाद निचे और मंदिर के पास मिलता है।
  4. अपने साथ कुछ नास्ता जरूर ले कर जाये। क्योकि ऊपर मंदिर के पास और चढाई रास्ते खाने के लिए कुछ नहीं मिलता।

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