Bodhi Tree : भगवान बुद्ध से सम्बंधित एक पवित्र वृक्ष

Bodhi tree

बोधि वृक्ष का शाब्दिक अर्थ ज्ञान का वृक्ष है। Bodhi Tree बोधगया स्थित एक विशाल पीपल का वृछ है। बौद्ध धर्म में इस पेड़ को सबसे प्रमुख और सम्मानित स्थान दिया गया है। क्योकि ईसा पूर्व 531 में Rajkumar Gautam को इसी वृक्ष के निचे बोध (ज्ञान) प्राप्त हुआ था। सात दिनों तक ज्ञान की खोज में बुद्ध इसी वृक्ष के निचे तपस्या किये और आत्मज्ञान प्राप्त होने के बाद गौतम बुद्ध को बुद्ध के नाम से जाना जाने लगा। ज्ञान प्राप्त करने के बाद बुद्ध इस स्थान को छोड़ कर धर्म प्रचार के लिए दूसरे प्रदेश में चले गए और बाद में उनके अनुयायी इस स्थान पर प्रार्थना लिए आने लगे।

Bodhi Tree यूनेस्को द्वारा घोसित विश्व विरासत स्थल का हिस्सा है। इतिहासकारों के अनुसार Emperor Ashoka बौद्ध धर्म अपनाने के बाद, अपने पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा को बोधिवृक्ष की टहनियों को श्रीलंका में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भेजा। श्रीलंका में Bodhi tree की टहनियों को अनुराधापुरम में लगाया गया जो आज भी मौजूद है।

यह बौद्ध धर्म का एक पवित्र धार्मिक स्थान है और चार मुख्य Buddhist shrine में से एक है। इसके आस पास कई पुराने स्तूप के साथ महाबोधि मंदिर भी बना हुआ है। Mahabodhi tree की आभा और मंदिर परिसर के पवित्रता के कारण आप स्थान पर कई बौद्ध भिक्षुओ, ध्यानियों, योगियों और पर्यटको को प्रार्थना करते देख सकते है।

बोधि वृक्ष भिक्षुओ और बौद्ध ध्यानियों का पवित्र स्थान

बहुत सारे पर्यटक इस स्थान पर बैठ कर, शान्ति के कुछ पल बिताते है। यह वृक्ष धार्मिक लोगों , इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस मंदिर में आपको बहुत ही शांत वातावरण और शांति मिलती है। जिसके कारण आप बोधि वृक्ष के निचे इस स्थान पर प्रार्थना कर, जीवन के अलग आनंद का अनुभव करते है।

Bodhi Tree
बोधगया स्थित बोधि वृक्ष @

इस मंदिर में आपको बहुत ही शांत वातावरण और शांति मिलती है, जिसके कारण आपको कई भिक्षु बोधि वृक्ष के आस पास के स्थान पर प्रार्थना करते रहते है।

बहुत सारे पर्यटक इस स्थान पर बैठ कर, शान्ति के कुछ पल बिताते है। यह वृक्ष धार्मिक लोगों , इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

बोधि दिवस समारोह

बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में प्रत्येक वर्ष 8 december को बोधि दिवस मनाया जाता है। इस दिन बौद्ध भिक्षु , बोधि वृक्ष के निचे Buddha के ज्ञानोदय का उत्सव मनाते है। इस उत्सव पर भगवान बुद्ध को विशेष भोजन परोसा जाता है। क्योकि ज्ञान प्राप्ति के बाद यह बुद्ध का पहला भोजन था और Sujata ने Lord Buddha को खाने के लिए दी थी।

इस उत्सव के दौरान मांस, शराब जैसे तामसिक खाद्य पदार्थ नहीं खया जाता और बुद्ध के अनुयायि सफेद रंग के कपड़े पहनते है। इस त्यौहार के दौरान पुरे मंदिर परिसर को रंगीन लाइट से सजाया जाता है। इस त्यौहार पर देश और विदेश से पर्यटक इस स्थान पर घूमने लिए आते है।

Best time to visit Bodhi tree (बोधि वृक्ष की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय)

बोधगया स्थिर बोधि वृक्ष घूमने का सबसे अच्छा समय October – March तक होता है। परन्तु, वास्तव में देश विदेश के बहुत Buddhist Tourist, यहाँ पर होने वाले धर्म और आध्यात्मिकता के विभिन्न आयोजनों में भाग लेने के लिए विशेष महीनों के दौरान भी आते हैं। आपके लिए May महीने में आयोजित होने वाली “Buddha Jayanti” उत्सव भी एक अच्छा मौका हो सकता है। क्योकि इस दौरान देश विदेश के बौद्ध धर्मगुरु इस स्थान पर प्रार्थना करने के लिए आते है।

Where is Mahabodhi tree (महाबोधि वृक्ष कहाँ है)

बोधि वृक्ष बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर में है, परन्तु महाबोधि मंदिर के पीछे स्थित है।

How to reach Bodhi tree (बोधि वृक्ष कैसे पहुंचे)

सड़क : बोधगया सड़क मार्ग द्वारा देश के प्रमुख शहरो से जुड़ा हुआ है। “बोधगया बस स्टैंड” और “गया बस स्टैंड” सबसे नजदीक का बस अड्डा है।

रेल : “गया रेलवे जंक्शन स्टेशन” सबसे नजदीक का रेलवे स्टेशन है और देश के प्रमुख नगरों और साथ ही स्थानीय रेलवे स्टेशन से जुड़ा हुआ है।

हवाई : “गया अंतर्रार्ष्ट्रीय हवाई अड्डा” सबसे नजदीक का हवाई अड्डा है।

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