तिब्बतियन मठ बोधगया : बोधगया का सबसे पुराना मठ

तिब्बतियन मठ बोधगया

बोधगया बौद्ध मंदिरो और बौद्ध मठो के लिए लोकप्रिय है। इसलिए आज हमलोग बोधगया के विभिन्न बौद्ध मंदिरों और मठो की यात्रा करेंगे। ये मठ अपने सुंदर वास्तुकला बनावट और खूबसूरत नक्कासी के लिए लोकप्रिय है। तिब्बतियन मठ बोधगया स्थित ऐसा ही एक प्राचीन मठ है। यह सबसे लोकप्रिय बोधगया के पर्यटन स्थल में से एक है। तिब्बतियन मठ बोधगया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा मठ है। इसका निर्माण 1934 ईस्वी में हुआ था और इस मठ का निर्माण तिब्बतियन वास्तुकला शैली में हुआ है। मठ बौद्ध भिक्षु और पर्यटक के लिए बहुत ही शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान करता है। इस स्थान पर कई बौद्ध धर्म के समुदाय से जुड़े बौद्ध भिक्षु भगवान बुद्ध की प्राथना करते रहते है। इस…

भारतीय पुरातात्विक स्थल 6 जुलाई से खुल चुके है देश के शैलानियों के लिए

भारतीय पुरातात्विक स्थल

देश में अनलॉक 2.0 के दौरान देश के सरकारे पर्यटन ब्यवसाय को सहूलियत देना चाहती है। इसलिए भारतीय पुरातात्विक विभाग पुरातात्विक पर्यटक स्थलों को कई दिशा – निर्देश के साथ आम जनता के लिए 6 जुलाई से फिर से खोल चुकी है। इन पुरातात्विक स्थल से कई तरह के ब्यवसाय जुड़े हुए है।देश के केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल के कहे अनुसार देश के सभी भारतीय पुरातत्व संरक्षित स्मारक शैलानियों के लिए कल सोमवार 6 जुलाई से खोल दिए गए है। इससे पहले संस्कृति मंत्रालय ने देश के लगभग 820 स्मारकों को धार्मिक कार्यक्रमों के लिए खोल दिया था। कोरोना महामारी के कारण मार्च 2020 के अंतिम सप्ताह से राष्ट्रव्यापी बंद किया गया था। देश में कुल लगभग 3000 से…

बाबा विश्वनाथ : शिव भक्तों के लिए 108 दिनों बाद पुनः सज कर तैयार है

बाबा विश्‍वनाथ

वाराणसी स्थित बाबा विश्वनाथ का मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण ज्योतिलिंग में से एक है। गंगा के तट पर स्थित यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है। प्रत्येक दिन हजारो की संख्या में श्रद्धालु गंगा में स्नान कर बाबा विश्‍वनाथ का जलाभिषेक कर पूजा करने आते है। परन्तु कोरोना के संक्रमण से बचाव के कारण देश के सभी मंदिरो को बंद करदिया गया था। वाराणसी भी वैश्विक कोरोना महामारी से अछूता नहीं था इसलिए प्रसिद्ध बाबा विश्वनाथ का मंदिर लोगों के दर्शन के लिए बंद कर दिया गया। मगर श्रद्धालु आज से बाबा विश्‍वनाथ का जलाभिषेक कर दर्शन सकेंगे। बाबा विश्‍वनाथ मंदिर आम जनता के लिए खुल गया कोरोना के कारण अनलॉक में भी गंगा के तट पर…

ग्रेट बुद्धा स्टेचू : देश में भगवान बुद्ध की सबसे बड़ी प्रतिमा

ग्रेट बुद्धा स्टेचू

बोधगया अपने यहाँ घूमने आने वाले पर्यटकों को कभी नीरास नहीं करता है। बोधगया स्थित बुद्ध को समर्पित कई खूबसूरत और नक्कासीदार स्मारक, मठ और स्तूप कई अन्य देशो द्वारा बनाया गया है। जिससे पर्यटकों का रोमांच हमेसा बढ़ा रहता है। इसी रोमांच को दुगना करने आज हमलोग बोधगया स्थित ग्रेट बुद्धा स्टेचू की प्रतिमा को देखने चलेंगे। बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर से कुछ मिनट की दुरी पर, भारत देश में स्थित भगवान बुद्ध की सबसे बड़ी प्रतिमा ग्रेट बुद्धा स्टेचू स्थित है। इस प्रतिमा का निर्माण 1989 ईस्वी में XIVth दलाई लामा ने कराया था। बुद्ध की विशाल मूर्ति ध्यान की मुद्रा में बनाया गया है। बुद्ध की प्रतिमा की उचाई 64 फुट है और 6 फुट ऊचे कमल…

भारत वर्चुअल टूर : देश विदेश के पर्यटकों को खूब पसंद आ रहा है

भारत वर्चुअल टूर

हाल के दिनों में जब देश में लॉकडाउन लगा है और बहुत से लोग अपने घर में कैद होकर बोर हो रहे है। ऐसे समय में आप “देखो अपना देश” भारत वर्चुअल टूर सीरीज को देख कर अपना बोरियत खत्म कर सकते है। यह वर्चुअल टूर सीरीज देश विदेश के बहुत से लोगों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। आप यह जानते होंगे की कोरोना महामारी संकट के चलते पूरी दुनिया में पर्यटन से जुड़ी सभी तरह की गतिविधियां थमी हुई हैं। ऐसे समय में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा शुरू की गयी “देखो अपना देश” टूर सीरीज केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर के लोगो द्वारा पसंद किया गया। यह देश में लॉकडाउन के शुरुआती समय में…

चार धाम यात्रा 2020 : 1 जुलाई से केवल उत्तराखंड के निवासियों के लिए

चार धाम यात्रा 2020

उत्तराखंड राज्य सरकार और चारधाम प्रबंधन समिति ने चार धाम यात्रा 2020 की अनुमति दे दी है। एक जुलाई दिन बुधवार से राज्य के प्रमुख चार धाम बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ की यात्रा की शरुआत होगी। 2020 की चार धाम यात्रा कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए केवल राज्य के भीतर के तीर्थयात्रियों के लिए शर्त के साथ खोलने का निर्णय लिया है। ये सभी प्रमुख धाम उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल क्षेत्र में आते हैं और प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थल हैं। चारधाम प्रबंधन समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने केवल उत्तराखंड राज्य के निवासियों को एक जुलाई से इन प्रमुख धामों की सशर्त यात्रा की अनुमति दे दी है। परन्तु रविनाथ रमन के आदेशानुसार “क्वांरटाइन क्षेत्र”…

बोधि वृक्ष : भगवान बुद्ध से सम्बंधित एक पवित्र वृक्ष

बोधि वृक्ष बोधगया

बोधि वृक्ष का शाब्दिक अर्थ ज्ञान का वृक्ष है। बोधि वृक्ष बोधगया स्थित एक विशाल पीपल का वृछ है। बौद्ध धर्म में इस पेड़ को सबसे प्रमुख और सम्मानित स्थान दिया गया है। क्योकि ईसा पूर्व 531 में राजकुमार सिद्धार्थ गौतम को इसी वृक्ष के निचे बोध (ज्ञान) प्राप्त हुआ था। सात दिनों तक ज्ञान की खोज में बुद्ध इसी वृक्ष के निचे तपस्या किये और आत्मज्ञान प्राप्त होने के बाद गौतम बुद्ध को बुद्ध के नाम से जाना जाने लगा। ज्ञान प्राप्त करने के बाद बुद्ध इस स्थान को छोड़ कर धर्म प्रचार के लिए दूसरे प्रदेश में चले गए और बाद में उनके अनुयायी इस स्थान पर प्रार्थना लिए आने लगे। बोधि वृक्ष यूनेस्को द्वारा घोसित विश्व विरासत…

बोधगया : विश्व में बौद्ध धर्म की राजधानी और एक विश्व विरासत स्थल

बोधगया

बिहार राज्य के कई जिलों में बौद्ध धर्म से सम्बंधित कई पुरातत्व स्थान मिले है ,जो इसको बौद्ध धर्म की जनम स्थली प्रमाणित करती है। बोधगया शहर बौद्ध धर्म से सम्बंधित एक विरासत स्थल है। बोधगया बिहार में गया शहर से कुछ दुरी पर स्थित बौद्ध धर्म के अनुयायियों का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यह पवित्र ,धार्मिक और सांत पर्यटन स्थल हजारों बौद्ध तीर्थयात्रियों को अपने तरफ आकर्षित करता है। यह शहर के शोरगुल से दूर और प्रकृति की गोद में स्थित एक शान्तिप्रिय शहर है। गौतम बुद्ध ने शहर के एक स्थान पर वृछ के निचे तपस्या कर ज्ञान की प्राप्ति की थी। गौतम बुद्ध ज्ञान की प्राप्ति के बाद बुद्ध हो गये और इस स्थान को छोड़…

महाबोधि मंदिर : भगवान बुद्ध से सम्बंधित विश्व की प्राचीन मंदिर

महाबोधि मंदिर

भारत देश में बिहार स्थित बोधगया का महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्म का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। यह बिहार का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है और बिहार घूमने वाले पर्यटकों के बिच काफी लोकप्रिय है। इस बौद्ध मंदिर का इतिहास बहुत ही गौरवशाली रहा है। इतिहासकारों के अनुसार 500 ईस्वी पूर्व गौतम बुद्ध ज्ञान की तलाश में बोधगया पहुंचे और एक बोधि वृछ निचे तपस्या करने लगे। ध्यान कर ज्ञान प्राप्त करने के बाद वे धर्म प्रचार करने के लिए वाराणसी स्थित सारनाथ चले गए। भगवान बुद्ध को जिस स्थान पर ज्ञान प्राप्त हुआ , उस स्थान पर 250 वर्ष बाद महान सम्राट अशोक ने महाबोधि मंदिर और मठ का निर्माण कराया था। बिहार का सबसे लोकप्रिय पर्यटन…

मंगला गौरी मंदिर गया : देश के 18 महाशक्ति पीठ में से एक

मंगला गौरी मंदिर गया

गया शहर में पर्यटकों को घूमने और देखने के लिए बहुत से खूबसूरत पर्यटन स्थल है। यह पर्यटन स्थल उनको गया के संस्कृति और उनसे सम्बंधित रोचक बात बतलाता है। इसलिए आज हम मंगला गौरी मंदिर गया जाएंगे। यह मंदिर गया शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलो में से एक है। यह देश के 18 महाशक्ति पीठ में से एक है और इस स्थान पर मुख्य रूप से शक्ति ( माँ दुर्गा ) के रूप की आराधना की जाती है। यह स्थान गया में तांत्रिक कार्यों के लिए भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस पवित्र स्थान पर माँ सती की मृत्यु के बाद, उनके शरीर का एक हिस्सा गिरा था। पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 110…

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